Writer and Poet. Play with words to express feelings.
Saturday, November 2, 2013
बस इतना ही
बस इतना ही
कल दीपाबली का दिन रबिबार की सुबह खूब सारी शॉपिंग बढ़िया बढ़िया खाना ढेर सारी मस्ती अपनों के साथ साथ ही साथ लक्ष्मी और गणेश का पूजन और क्या चाहियें मित्रों और अपनों कि शुभकामनायें बस इतना ही काफी है। शुभ रात्रि दीपावली मुबारक
पाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक | वली-वलीमुख अवध में, सबके प्रभु तो एक | सब के प्रभु तो एक, उन्हीं का चलता सिक्का | कई पावली किन्तु, स्वयं को कहते इक्का | जाओ उनसे चेत, बनो मत मूर्ख गावदी | रविकर दिया सँदेश, मिठाई पाव पाव दी ||
वली-वलीमुख = राम जी / हनुमान जी पावली=चवन्नी गावदी = मूर्ख / अबोध
पाव पाव दीपावली, शुभकामना अनेक |
ReplyDeleteवली-वलीमुख अवध में, सबके प्रभु तो एक |
सब के प्रभु तो एक, उन्हीं का चलता सिक्का |
कई पावली किन्तु, स्वयं को कहते इक्का |
जाओ उनसे चेत, बनो मत मूर्ख गावदी |
रविकर दिया सँदेश, मिठाई पाव पाव दी ||
वली-वलीमुख = राम जी / हनुमान जी
पावली=चवन्नी
गावदी = मूर्ख / अबोध