Wednesday, April 17, 2013

सुन्दर हिंदी प्यारी हिंदी में प्रकाशित ग़ज़ल(हालात कैसे आज बदले है)
















 







सुन्दर हिंदी प्यारी हिंदी में प्रकाशित ग़ज़ल :





दीवारें ही दीवारें नहीं दीखते अब घर यारों
बड़े शहरों के हालात कैसे आज बदले है.

उलझन आज दिल में है कैसी आज मुश्किल है
समय बदला, जगह बदली क्यों रिश्तें आज बदले हैं

जिसे देखो बही क्यों आज मायूसी में रहता है
दुश्मन दोस्त रंग अपना, समय पर आज बदले हैं

जीवन के सफ़र में जो पाया है सहेजा है
खोया है उसी की चाह में ,ये दिल क्यों मचले है

समय ये आ गया कैसा कि मिलता अब समय ना है
रिश्तों को निभाने के अब हालात बदले हैं



(आप के लिए श्री मदन मोहन सक्सेना जी की रचना "हालात कैसे आज बदले है")

5 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति
    शुभकामनायें आदरणीय ||

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  2. अति सुन्दर..
    महोदय ऐसे ही समाज को दिशा देते रहे...

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  3. बहुत सुन्दर....बेहतरीन प्रस्तुति
    पधारें बेटियाँ ...

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  4. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति शुक्रवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  5. यथार्थ को कहती सुंदर गज़ल

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