Tuesday, February 5, 2013

दोष


 











दोष



ये दोष मेरे भाग्य का या वक़्त की साजिश कहें
हम प्यार जिनसे कर रहे बे दूर हमसे रह रहे

देखा तो होती  है सुबह , ना   पा सके  तो रात है
कल तलक जो बश में था ना आज अपने हाथ  है

जिस दिल पर अखित्यार  था बह आज बेगाना हुआ
जिस पल को नजरें मिल गयी बस गीत बन जाना हुआ

आँखों में सूरत बस गयी लबों पर उनका नाम है
उनकी बंदगी करते रहे बस   ये  ही   अपना  काम है  

हर  गीत   मेरे प्यार की खामोश सी आबाज है
ना जाने कब बो जानेंगें मेरे दिल का जो भी राज है

होगी सुबह अगले ही पल कुछ पल की केबल शाम है
प्यार केवल कर मदन , लगनें दे जो इल्जाम हैं


काब्य प्रस्तुति :   
मदन मोहन सक्सेना

3 comments:

  1. ये ही अपना काम है.......... कहर बरपा दिया है आपने।

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  2. होगी सुबह अगले ही पल कुछ पल की केबल शाम है
    प्यार केवल कर मदन , लगनें दे जो इल्जाम हैं
    बहुत ही खुबसूरत गजल ,आशावादी दृष्टिकोण प्रेम की भावनात्मक अभिव्यक्ति ,शुभकामनाये

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