Wednesday, January 10, 2018

मुझे सिर्फ तेरी तलाश है







मेरे हमनसी मेरे हमसफ़र ,तुझे खोजती है मेरी नजर
तुम्हें हो ख़बर कि  न हो ख़बर ,मुझे सिर्फ तेरी तलाश है

मेरे साथ तेरा प्यार है ,तो जिंदगी में बहार है
मेरी जिंदगी तेरे दम से है ,इस बात का एहसास  है

तेरे इश्क का है ये असर ,मुझे सुबह शाम की ना  ख़बर
मेरे दिल में तू रहती सदा , तू ना दूर है और ना पास है

ये तो हर किसी का खयाल है ,तेरे रूप की न मिसाल है
कैसें कहूँ  तेरी अहमियत, मेरी जिंदगी में खास है

तेरी झुल्फ जब लहरा गयी , काली घटायें छा गयी
हर पल तुम्हें देखा करू ,आँखों में फिर भी प्यास है




मदन मोहन सक्सेना 

Wednesday, December 20, 2017

चाँद सूरज फूल में बस यार का चेहरा मिला







हर सुबह  रंगीन   अपनी  शाम  हर  मदहोश है
वक़्त की रंगीनियों का चल रहा है सिलसिला

चार पल की जिंदगी में  मिल गयी सदियों की दौलत
जब मिल गयी नजरें हमारी  दिल से दिल अपना मिला

नाज अपनी जिंदगी पर क्यों न हो हमको भला
कई मुद्द्दतों के बाद फिर  अरमानों का पत्ता हिला

इश्क क्या है  आज इसकी लग गयी हमको खबर
रफ्ता रफ्ता ढह गया  तन्हाई का अपना किला

वक़्त भी कुछ इस तरह से आज अपने साथ है
चाँद सूरज फूल में बस यार का चेहरा मिला

दर्द मिलने पर शिकायत क्यों भला करते मदन
जब दर्द को देखा तो  दिल में मुस्कराते ही मिला


चाँद सूरज फूल में बस यार का चेहरा मिला

मदन मोहन सक्सेना

Wednesday, December 13, 2017

घायल हुए उस रोज हम जिस रोज मारा प्यार से






जालिम लगी दुनियाँ  हमें हर शख्श  बेगाना लगा
हर पल हमें धोखे मिले अपने ही ऐतबार से

नफरत से की गयी चोट से हर जख़्म  हमने सह लिया
घायल हुए उस रोज हम जिस रोज मारा प्यार से

प्यार के एहसास  से जब जब रहे हम बेखबर
तब तब लगा हमको की हम जी रहे बेकार से

इजहार राजे दिल का वो जिस रोज मिल करने लगे
उस रोज से हम पा रहे खुशबु भी देखो खार से


प्यार से सबसे मिलो ये चार पल की जिंदगी है
मजा पाने लगा है अब ये मदन प्यार में तकरार से


घायल हुए उस रोज हम जिस रोज मारा प्यार से

मदन मोहन सक्सेना

Friday, December 8, 2017

मुझे दिल पर अख्तियार था ये कल की बात है





उनको तो हमसे प्यार है ये कल की बात है
कायम ये ऐतबार था ये कल की बात है

जब से मिली नज़र तो चलता नहीं है बस
मुझे दिल पर अख्तियार था ये कल की बात है

अब फूल भी खिलने लगा है निगाहों में
काँटों से मुझको प्यार था ये कल की बात है

अब जिनकी बेबफ़ाई के चर्चे हैं हर तरफ
वह  पहले बफादार थे ये कल की बात है

जिसने लगायी आग मेरे घर में आकर के
वह  शख्श मेरा यार था ये कल की बात है

तन्हाईयों का गम ,जो मुझे दे दिया उन्होनें
बह मेरा गम बेशुमार था ये कल की बात है



 मुझे दिल पर अख्तियार था ये कल की बात है

मदन मोहन सक्सेना

Tuesday, December 5, 2017

भरोसा हो तो किस पर हो सभी इक जैसे दिखतें हैं



किसको आज फुर्सत है किसी की बात सुनने की
अपने ख्बाबों और ख़यालों  में सभी मशगूल दिखतें हैं

सबक क्या क्या सिखाता है जीबन का सफ़र यारों
मुश्किल में बहुत मुश्किल से अपने दोस्त दिखतें हैं

क्यों  सच्ची और दिल की बात ख़बरों में नहीं दिखती
नहीं लेना हक़ीक़त से  क्यों  मन से आज लिखतें हैं

धर्म देखो कर्म देखो अब असर दीखता है पैसों का
भरोसा हो तो किस पर हो सभी इक जैसे दिखतें हैं

सियासत में न इज्ज़त की ,न मेहनत की  कद्र यारों
सुहाने स्वप्न और ज़ज्बात यहाँ हर रोज बिकते हैं

दुनिया में जिधर देखो हज़ारों रास्ते दीखते
मंजिल जिनसे मिल जाये बह रास्ते नहीं मिलते


भरोसा हो तो किस पर हो सभी इक जैसे दिखतें हैं

मदन मोहन सक्सेना

Monday, November 20, 2017

दूर रह कर हमेशा हुए फासले

दूर रह कर हमेशा हुए फासले ,चाहें रिश्तें कितने क़रीबी  क्यों ना हों
कर लिए बहुत काम लेन देन  के ,विन  मतलब कभी तो जाया करो

पद पैसे की इच्छा बुरी तो नहीं मार डालो जमीर कहाँ ये सही
जैसा देखेंगे बच्चे वही सीखेंगें ,पैर अपने माँ बाप के भी दबाया करो

काला कौआ भी है काली कोयल भी है ,कोयल सभी को भाती  क्यों है
सुकूँ दे चैन दे दिल को ,अपने मुहँ में ऐसे ही अल्फ़ाज़ लाया करो

जब सँघर्ष है तब ही  मँजिल मिले ,सब कुछ सुबिधा नहीं यार जीबन में है
जिस गली जिस शहर में चला सीखना , दर्द उसके मिटाने भी जाया करो

यार जो भी करो तुम सँभल करो ,  सर उठे गर्व से ना झुके शर्म से
वक़्त रुकता है किसके लिए ये "मदन" वक़्त ऐसे ही अपना ना जाया करो


दूर रह कर हमेशा हुए फासले

मदन मोहन सक्सेना

Monday, October 9, 2017

भरोसा टूटने पर यार सब कुछ टूट जाता है

भरोसा टूटने पर यार सब कुछ टूट जाता है


भरोसा है तो रिश्तें हैं ,रिश्तें हैं तो खुशहाली
भरोसा टूटने पर यार सब कुछ टूट जाता है

यारों क्यों लगा करतें हैं दुश्मन जैसे अपने भी
किसी के यार जीबन में समय जब रूठ जाता है

समय की माँग है यारों रिश्तों को समय देना
अनदेखी में लगाया पौधा अक्सर सूख जाता है

बुरा कोई नहीं होता बुरे हालात होते हैं
दो पैसों के खातिर अपनों का साथ छूट जाता हैं

गज़ब हैं लोग दुनिया के गज़ब हैं रंग दुनिया के
जिसकी जब जरुरत हो तब ही रूठ जाता है

समय के साथ चलना क्यों बहुत मुश्किल हुआ करता
मदन जीबन यार बुलबुला है आखिर फूट जाता है


मदन मोहन सक्सेना

Friday, September 29, 2017

तुम भक्तों की रख बाली हो

तुम भक्तों की रख बाली हो ,दुःख दर्द मिटाने  बाली हो
तेरे चरणों में मुझे जगह मिले अधिकार तुम्हारे हाथों में


नब रात्रि में भक्त लोग माँ दुर्गा के नौ स्वरूप की पूजा अर्चना करके माँ का आश्रिबाद  प्राप्त करतें है।
पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है।
वन्दे वांछितलाभाय चन्दार्धकृतशेखराम।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्।।


मां दुर्गा की नव शक्तियों का दूसरा स्वरूप ब्रह्मचारिणी का है.
दधानां करपद्माभ्यामक्ष मालाकमण्डलू.
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा..
यहां ब्रह्मशब्द का अर्थ तपस्या है.


मां दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चन्द्रघण्टाहै.
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैयरुता.
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता..
मां दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चन्द्रघण्टाहै. नवरात्र उपासना में तीसरे दिन इन्हीं के विग्रह का पूजन-आराधन किया जाता है.

मां दुर्गाजी के चौथे स्वरूप का नाम कूष्माण्डा है।
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे।।
अपनी मन्द , हलकी हंसी द्वारा अण्ड अर्थात् ब्रहृाण्ड को उत्पन्न करने के कारण इन्हें कूष्माण्डा देवी के नाम से अभिहित किया गया है।
मां दुर्गाजी के पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है।
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।
ये भगवान् स्कन्द 'कुमार कात्र्तिकेय' की माता  है। इन्हीं भगवान् स्कन्द की माता होने के कारण मां दुर्गा जी के इस पांचवें स्वरूप को स्कन्दमाता के नाम से जाना जाता है।



मां दुर्गा के छठवें स्वरूप का नाम कात्यायनी है।
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवद्यातिनी।।
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी।।
प्रसिद्ध महर्षि कत के पुत्र ऋषि कात्य के गोत्र में महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। उन्होंने भगवती पराम्बा की घोर उपासना की और उनसे अपने घर में पुत्री के रूप में जन्म लेने का आग्रह किया। कहते हैं, महिषासुर का उत्पात बने पर ब्रहृा, विष्णु, महेश तीनों के तेज के अंश से देवी कात्यायनी महर्षि कात्यायन की पुत्री के रूप में उत्पन्न हुई थीं।

नवरात्र के सातवें दिन आदिशक्ति मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की उपासना की जाती है.  
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता, लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी।।
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा, वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी।।
मां कालरात्रि का स्वरूप देखने में अत्यन्त भयानक है, लेकिन ये सदैव शुभ फल ही देने वाली हैं. इसी कारण इनका एक नाम 'शुभंकरी' भी है.दुर्गा पूजा के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना का विधान है.

मां दुर्गाजी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। इनका वर्ण पूर्णत: गौर है।
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचि:।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेव प्रमोददा।।
इस गौरता की उपमा शंख, चन्द्र और कुन्द के फूल से दी गयी है। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गयी है।

मां दुर्गाजी की नवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री है।
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी।।
ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। मार्कण्डेयपुराण के अनुसार अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व-ये आठ सिद्धियां होती हैं।नवरात्र-पूजन के नवें दिन इनकी उपासना की जाती है।नव दुर्गाओं में मां सिद्धिदात्री अन्तिम हैं।


Monday, September 18, 2017

ग़ज़ल (दोस्त अपने आज सब क्यों बेगाने लगतें हैं)


ग़ज़ल (दोस्त अपने आज सब क्यों बेगाने  लगतें हैं)



जब अपने चेहरे से नकाब हम हटाने लगतें हैं
अपने चेहरे को देखकर डर जाने लगते हैं


वह  हर बात को मेरी क्यों दबाने लगते हैं
जब हकीकत हम उनको समझाने लगते हैं


जिस गलती पर हमको वह  समझाने लगते है
वही  गलती को फिर वह  दोहराने लगते हैं


आज दर्द खिंच कर मेरे पास आने लगतें हैं
शायद दर्द से मेरे रिश्ते पुराने लगतें हैं


दोस्त अपने आज सब क्यों बेगाने  लगतें हैं
मदन दुश्मन आज सारे जाने पहचाने लगते हैं 

ग़ज़ल (दोस्त अपने आज सब क्यों बेगाने  लगतें हैं)
मदन मोहन सक्सेना

Wednesday, September 13, 2017

जय हिंदी जय हिंदुस्तान मेरा भारत बने महान






हिंदी दिवस की अग्रिम शुभ कामनायें


गंगा यमुना सी नदियाँ हैं जो देश का मन बढ़ाती हैं
सीता सावित्री सी देवी जो आज भी पूजी जाती हैं


यहाँ जाति धर्म का भेद नहीं सब मिलजुल करके रहतें हैं
गाँधी सुभाष टैगोर तिलक नेहरु का भारत कहतें हैं

यहाँ नाम का कोई जिक्र नहीं बस काम ही देखा जाता है
जिसने जब कोई काम किया बह ही सम्मान पाता है

जब भी कोई मिले आकर बो गले लगायें जातें हैं
जन आन मान की बात बने तो शीश कटाए जातें हैं

आजाद भगत बिस्मिल रोशन बीरों की ये तो जननी है
प्रण पला जिसका इन सबने बह पूरी हमको करनी है

मथुरा हो या काशी हो चाहें अजमेर हो या अमृतसर
सब जातें प्रेम भाब से हैं झुक जातें हैं सबके ही सर.
 
जय हिंदी जय हिंदुस्तान मेरा भारत बने महान

मदन मोहन सक्सेना